NCERT Class 6 Chapter 2 - The Kite - Hindi Explanation
October 17, 2021
ऐसा लगता है मानों वो जैसे वो गोते लगा रही है। कलावाजे दिखा रही है। और अपने पूंछ को फरफराते हुए हवा की ओर आकाश के तरफ उड़ जाती है।
जब पतंग आकाश की और को उड़ती है, तो ऐसा लगता है मानों जैसी की वो एक जहाज है। जिस तरह जहाज पानी के लहरों के साथ ऊपर उठता है, और लहरों के चोटी की ऊपर चढ़ जाता है। उसी तरह तेज हवा की झोकों के साथ पतंग आकाश के और को उड़ जाती है।
यहां पे कवि कहते हैं जब पतंग आकाश की और को उड़ रही होती है, तो ऐसा लगता है मानों जैसे कोई डोर से कोई उसे अपनी तरफ खींच रहा है। लेकिन जब हवा थम जाती है, पतंग अपने आप नीचे की और आ जाती है।
आगे कवि कहते हैं कि जब पतंग की डोर ढीली पड़ जाती है और पतंग जमीन पे गिर जाता है, तो हम उसकी डोर को लपेट लेते हैं और उसके बाद हम फिर से तेज दौड़ते हैं और हम तबतक दौड़ते हैं जबतक कि नई तेज हवा चलने नहीं लग जाती।
इसके बाद पतंग पंख में हवा भर जाती है और वो आसमान के और को उड़ जाती है। तब साफ मिले आकाश में वह पतंग और भी ज्यादा चमकदार दिखती है।
अंत में कवि कहते हैं कि सबसे बुरा तब लगता है जब आपकी पतंग किसी पेड़ की चोटी में फस कर एक धागे से बंधी हुई फड़फड़ाते हुए फट जाती है। तब वही पतंग सब ज्यादा बुरी और गंदी दिखती है।
Post a Comment